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रूत 1

8 ओमअपण्‍बहकहा, "थम अपणे-अपणहर पस चलअर ितरिां थमनमरगैं अर करयै, उसतरिां यहदयकरै। 9 यहइसकरथम अपणे-अपणघरआळघर आर" ओमउन ीं ा, अर ्‍र-मरक1:9 नाओमी नै उन ताहीं चुम्या, अर वे रुक्‍के मार-मारकै रोण लाग्गी नाओमी नै उन ताहीं चुम्या अर अलविदा कह्या, 10 अर उसतकहा, "जरहम णसां ्‍ांी।" 11 पर ओमकहा, "िों, हड, थम ूँ ओगी? और ैं घरआळों? 12 िों, हड, ूँघरआळकरण तर ़ी ूं। अर कहूँ ी, मन्‍आस ै, अर आज घरआळा, अर े, 13 थम उनकतक आस लगहररही? अर उनकतर घरआळबणण तर रही? िों, इसो, ूँघणबढै; ो, यहिउठै।" 14 ्‍र-मरकी; अर ओरअपणीं अर अपणघरां चलगई, पर उसतअलग

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