मैन्हेरे मट्ठेरू ज़ींतू भोनू
25 "दिहाड़े चैंदनरी ते तारन मां निशान बांदे भोनेन ते धेरती पुड़ कौमन बड़ी तकलीफ पुज़नियें, किजोकि समुन्दरेरी लैहेरां केरि शौरी सेइं तैना डेरि गानेन। 26 डर्रे मारे एजने बैली मुसीबतरे इंतज़ार केरते-केरते तैन केरे होश उड़ी गानेन, किजोकि अम्बरेरी सैरी शेक्ति हिल्लेली। 27 तैखन लोक मैन्हेरू मट्ठू बेड़ि शेक्ति ते महिमा सेइं बिदलारी मां एंइतू लाहेले। 28 ज़ैखन एन गल्लां भोनी शुरू भोल्ही त सिद्धे खड़े भोइतां उबरू तेकथ, किजोकि तुश्शो छुटकारो भोने बालोए।"