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यशायाह 58

बरतियम

1 यह़ोे, "़ोिां , िपतरख, नरशिं़ेि आवउच्‍; रजमतलब घरिा। 2 ़ैआरधनरतन बत ़ाएरइचरतन ़ेधरकन, ़ैअपनपरमशरमन, ़ैधरियम तन परमशऱे एजनतन3 ़ोतन, वजि असबरत रखू, पन ीं खबर ? अस़ै्‍ो, पन ीं ििू?’ ा, बरति़े अपनि इचरतथ अपनवकन करां िकमां करतथ4 बरतफल ि एपांलडतथ धक्‍रतथ़ेबरत अजरतथ, थनतगर ़़्े। 5 ़ैबरतअवपसरतं, मतलब ़ैां अपनआप े, इस तररतथ? ़ी एऱेि ी, एपि़ाू, ांिरनबरत यहरनि़ी ़ोतथ?

6 "़ैबरतअवं, इन नईं, ि अनदब, ़ुलमां , सब ़े-़े रथ?58:6 लूक. 4:18-19;कह. 21:3;याक. 1:27. 7 इन नईि अपनि ियनेंटतां , अने-िरनकन अपनघरआनथ; ़ैां नगिगड़ां ; एपनमरकरां अपनआप ़ु?58:7 इब्रा. 13:2-3;कह. 25:21;28:27;मत. 25:35-36. 8 अगर एने, खन ़े़े़ेि चमकी, ़ोो; िकतीं अगी-अगी, यहमहिीं पतरकरतां ी।58:8 भज. 37:6;यिर्म. 33:6;लूक. 1:78-79. 9 खन यहो, फरि़ोो, अवइड़ी आईं,’ अगर ़ुलम रनरन गलखड़ी रऩे, गल्‍ां ़ोकरां एजस, 10 अगर ियनिलतां मददत रस, रतमनां ि रतां रस, खन धरां चमकी, बड़ू धरपहरां ़ेचमकू। 11 यहीं लगो, वकीं रज़ातऱा ो; एऱे़ेकध्‍े। 12 नदबड़े ़िउजरन िबसे, ़ी-़ी ि वरिघर बनो; नव़ेबनबतां रनू।"

करि़ी मन

13 "अगर आरि़े अशरस मतलब पविि़े ां अपनि इचरनि, आरि़े आननि़ी यहपविि़ी मझां मननस; अगर आदर रतां ि़े अपनबतां लस, अपनि मऱी रस, एपनगल्‍ां ़ो, 14 यहवजो, अवीं उच्‍रन इलो; वज िमरां फसल ीं इलो, िि यहएन ़ोवर"

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