28 यो सब कुछ नबूकदनेस्सर राजा पर बिती गयो. 29 बारा महीना का बितना पर जब उ बेबीलोन का राजभवन कि छत पर घुमी रो थो, तब यो बोलन लग्यो, 30 "का यो बडो बेबीलोन नी हइ, जेखे मेने ही अपनी ताखत अरु सामर्थ्य से राजनिवास होन को अरु अपनी महिमा की बडाइ का लिये बसायो हइ?" 31 यो वचन राजा का मुडा से निकल्यो भी नी थो कि आकाशवानी हुइ, "हे राजा नबूकदनेस्सर, तरा बारे मे या आज्ञा निकली हइ : राज तरा हात से निकली गो, 32 अरु तू इन्सानहोन का बिच से निकाल्यो जाये, अरु मैदान का जनवरहोन का सात ऱ्हीहे; अरु बैलहोन का जसो घास चले; अरु सात साल तरा पर बिते, जब तक कि तू नी जानी ले की परममुखिया, इन्सानहोन का राज मे राज करस हइ अरु जेखे चाहे उ ओखे दी देस हइ." 33 उही टेम यो वचन नबूकदनेस्सर का बारे मे पुरो हुयो. उ इन्सानहोन मे से निकाल्यो गयो, अरु बैलहोन का जसो घास चरन लग्यो, अरु ओको आग बद्दल कि ओस मे गिलो होतो थो, यहा तक कि ओका बाल गरुड का पंखहोन से अरु ओका नख चिडीहोन का पंजाहोन का जसा बडी गा.
नबूकदनेस्सर का वजेसे परमेश्वर कि महिमा करनो
34 सात साल का बितना पर, मेखे नबूकदनेस्सर ने अपना आख स्वर्ग का तरप उठय, अरु मरी दिमाक फिर जहा का तहा हुइ गइ; तब मे ने परममुखिया खे धन्य बोल्यो, अरु जो हमेशा जिन्दो हइ स्तुति अरु महिमा यो बोलीखे करन लग्यो :
ओकी शासन हमेशा की हइ,
अरु ओको राज पीढी से पीढी तक
बनी ऱ्हेनआली हइ.
35 पृथ्वी का सब ऱ्हेनवाला ओका समाने
बेकार गिन्या जास हइ,
अरु उ स्वर्ग कि सेना अरु पृथ्वी का
ऱ्हेनवाला का बिच
अपनी ही इच्छा का अनुसार काम करस हइ;
अरु कोय ओखे रोकीखे4:35 ओको हात मारी खे ओका से नी
बोली सकस हइ, "तोने यो का कऱ्यो हइ?"
36 उही टेम, मरी डिमाक फिर जहा की तहा हुइ गइ; अरु मरा राज कि बडाइ का लिये मरो राज अरु मुकुट मरा पर फिर अय गो. मरा मंत्रि अरु मुखिया दुनिया मरा से मिलन करन का लिये आन लग्या, अरु मी अपना राज मे स्थिर हुइ गो; अरु मरी अरु जादा प्रशंसा होन लगी. 37 अब मी नबूकदनेस्सर स्वर्ग का राजा कि बडाइ हुये; अरु ओकी स्तुति अरु महिमा करुस हइ, क्युकी ओका सब काम सच्चा, अरु ओका सब व्यवहार न्याय का हइ; अरु जो दुनिया घमण्ड से चलस हइ, उनखे उ नीचो करी सकस हइ.