3 कयक परमशवर स परम रखन यह ह क हम उसक आजञओ क पलन कर, और उसक आजञए कठन नह ह। 4 कयक ज कई परमशवर स उतपनन हआ ह वह ससर पर जय पत ह; और वह वजय जसन ससर पर जय पई ह, हमर वशवस ह। 5 ससर पर जय पनवल कन ह? कवल वह ज यह वशवस करत ह क यश ह परमशवर क पतर ह।
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