जवान को सलाह
1 अपनी जवानी के दिनों में अपने सृजनहार को स्मरण रख : इससे पहले कि विपत्ति के दिन आएँ और ऐसे वर्ष आ पहुँचें जिनमें तू कहे कि मेरा मन इनमें नहीं लगता; 2 इससे पहले कि सूर्य और प्रकाश और चंद्रमा और तारागण अंधकारमय हो जाएँ, और वर्षा के बाद बादल फिर से घिर आएँ; 3 इससे पहले कि घर के रखवाले काँपें, बलवान पुरुष झुक जाएँ, पीसनेवालियाँ थोड़ी होने के कारण कार्य करना बंद कर दें, और झरोखों में से झाँकनेवालियों की आँखें धुंधली पड़ जाएँ;