यहूदाह की मिस्र के साथ एक बेकार सुलह
1 ख़ुदावन्द फ़रमाता है, "उन बाग़ी लड़कों पर अफ़सोस जो ऐसी तदबीर करते हैं जो मेरी तरफ़ से नहीं, और 'अहद — ओ — पेमान करते हैं जो मेरी रूह की हिदायत से नहीं; ताकि गुनाह पर गुनाह करें। 2 वह मुझ से पू छे बग़ैर मिस्र को जाते हैं ताकि फ़िर’औन के पास पनाह लें और मिस्र के साये में अम्न से रहें। 3 लेकिन फ़िर’औन की हिमायत तुम्हारे लिए ख़जालत होगी और मिस्र के साये में पनाह लेना तुम्हारे वास्ते रुस्वाई होगा। 15 क्यूँकि ख़ुदावन्द यहोवाह, इस्राईल का क़ुददूस यूँ फ़रमाता है, कि वापस आने और ख़ामोश बैठने में तुम्हारी सलामती है; ख़ामोशी और भरोसे में तुम्हारी ताक़त है।" लेकिन तुम ने यह न चाहा।