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उत्पत्ति 34

िरषकरय

1 एक ििा, भयी, कनिों ेंकरन गयी। 2 तब रधहमहमशकिि ो, शकपकडिअऊर अपनिसमबनबनओख रषकर ो। 3 तब शकमन लग गयो, अऊर ओन करी, अऊर ओककरन लगो। 4 तब शकअपनहमकहो, "पतिे।"

5 अऊर ि शकअशकर हय; पर समय जनवरों ो, उनआनतक रहो। 6 तब शकहमिकल तचकरन ओकजवर गयो। 7 तब ों असबहउदअऊर आयो; कहि शकइसएलसमखतकरयो, असकरनबहगलत 8 हमउन सब कहो, "शकहरबहकरन लगहय, पयअपनपतशकरदकर ो। 9 अऊर हम ों िसमबनो; अपनिां हमो, अऊर हमरिां ो। 10 तब हमररहसको; दरवहरें, यहां रहअऊर करो, अऊर धन समपति कमो।"

11 शकअऊर ऊवों कहो, "यदि पर ों अनरह नजर ो, कहो, मय ं। 12 ितनअऊर ेंांो, उतनमय हरवचन अनं; पर वल अपनपतरदकर ो।"

13 तब ि शकहमरबहिअशकरयहय, ों शकअऊर ओकहमछल उततर िो, 14 ि "हम असनहीं कर सकजि िखतनआदमहम अपनबहिो, कहि हमरअपमें15 हम वल शरपर हरसकजि हमरजसहरि हर एक आदमखतनकरये। 16 तब हम अपनिां ों ो, अऊर हरिां हम अपनो, अऊर हरबसरहयबों, अऊर हम एकच ि आदमबन ो। 17 पर यदि हमरनहीं अऊर खतननहीं करो, हम अपनइत चलो।"

18 उनपर हमअऊर ओकशकभयो। 19 अऊर वक शकओकांकरननहीं करयो, कहि बहहत ो। अपनपरिबहमहतवपआदमो।

20 हमअऊर ओकशकअपननगर टक जवर नगर रहन समझलगो, 21 "ि आदमहमरिलझरहनहवय , उनरहकरन ो; ो, जमउनबहहय; तब हम उनिों िकर ो, अऊर अपनिों उनिकरबो। 22 ि वल पर हमररहन अऊर एकच ि ि उनजसहमरसब आदमिों खतनकरये। 23 तब उनेंिां, अऊर बईल अऊर उनजनवर अऊर धन समपति हमरनहीं ें? इतनकरि हम उने, ि हमररहें" 24 ितननगर टक िकलत ो, उन हमअऊर ओकशकी; अऊर हर एक आदमखतनकरयगयो, ितननगर टक िकलत ो।

25 सरि, जब खतनकरयु:पड़्ो, तब असभयि िअऊर ों , ो, अपनअपनतलवधर नगर धडसब आदमिों ो। 26 हमअऊर ओकशकउनतलवो, अऊर शकघर ििो। 27 सरों लन पर उननगर िि नगर उनबहिअशकरगयी। 28 उनेंबईल, गधा, अऊर नगर अऊर ितनधन िो। 29 उन सब , अऊर उनबचा, अऊर उनईयों िो, अऊर घर घर उनउनिो।

30 तब िअऊर कहो, "िकनिों अऊर परिि मन िनफरत करहय, कट हय, कहि ़ो ; अब ि जमपर हमलकरें, अऊर ें, मय अपनघरसहं।"

31 उनकहो, "हमरबहिजसबरकरे?"

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