आदमी जाति की दुष्टता
1 जब आदमी जमीन पर बहुत बढ़न लग्यो, तब उन्ख बेटियां पैदा होन लगी, 2 तब परमेश्वर को बेटावों न आदमी की बेटियों ख देख्यो, कि हि सुन्दर हंय, अऊर उन्न जेक जेक चाह्यो ओन बिहाव कर लियो। 3 तब परमेश्वर न कह्यो, "मोरी आत्मा आदमी म हमेशा निवास नहीं करेंन, कहालीकि आदमी भी शरीरच आय; ओकी उमर एक सौ बीस साल की होयेंन।" 4 6:4 गिनती 13:33उन दिनो म धरती पर दानव6:4 नपेली लोग रहत होतो; अऊर येको बाद जब परमेश्वर को बेटा अऊर आदमी की बेटियों को जवर गयो तब उन्को द्वारा जो बेटा पैदा भयो हि प्राचीनकाल को शक्तिशाली अऊर प्रसिद्ध वीर होतो।
5 परमेश्वर न देख्यो कि आदमियों की बुरायी धरती पर बढ़ गयी हय, अऊर उन्को मन को बिचार म जो कुछ पैदा होवय हय ऊ हर समय बुरायी लायीच होवय हंय।6:5 मत्ती 24:37; लूका 17:26 6 यो बात सी प्रभु ख दु:ख भयो कि ओन धरती पर आदमी ख बनायो, अऊर ओको मन ख बहुत ठेस पहुंची। 7 तब परमेश्वर न कह्यो, "मय आदमी ख जेकी मय न सृष्टि करी हय धरती को ऊपर सी मिटाय देऊं; का आदमी, का, जनावर, का रेंगन वालो जन्तु, का आसमान को पक्षी, सब ख मिटाय देऊं, कहालीकि मोख यो बात को दु:ख हय कि मय न उन्ख बनायो।" 8 पर परमेश्वर को अनुग्रह की नजर नूह पर बनी रही।
नूह
9 नूह की वंशावली यो हय। नूह सच्चो पुरुष अऊर अपनो समय को लोगों म खरो होतो; अऊर नूह परमेश्वर कोच संग संग चलतो रह्यो।