6 क्योंकि ज्ञान को देनेवाला याहवेह ही हैं;
उन्हीं के मुख से ज्ञान और समझ की बातें बोली जाती हैं.
7 खरे के लिए वह यथार्थ ज्ञान आरक्षित रखते हैं,
उनके लिए वह ढाल प्रमाणित होते हैं, जिनका चालचलन निर्दोष है,
8 वह बिना पक्षपात न्याय प्रणाली की सुरक्षा बनाए रखते हैं
तथा उनकी दृष्टि उनके संतों के चालचलन पर लगी रहती है.