5 याहवेह पर अपने संपूर्ण हृदय से भरोसा करना,
स्वयं अपनी ही समझ का सहारा न लेना;
6 अपने समस्त कार्य में याहवेह को मान्यता देना,
वह तुम्हारे मार्गों में तुम्हें स्मरण करेंगे.
5 याहवेह पर अपने संपूर्ण हृदय से भरोसा करना,
स्वयं अपनी ही समझ का सहारा न लेना;
6 अपने समस्त कार्य में याहवेह को मान्यता देना,
वह तुम्हारे मार्गों में तुम्हें स्मरण करेंगे.
5 तू संपूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना,
और अपनी समझ का सहारा न लेना।
6 अपने सब कार्यों में तू यहोवा को स्मरण करना,
तब वह तेरे लिए सीधा मार्ग निकालेगा।
5 तू अपनी समझ का सहारा न लेना,
वरन् सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना3:5 यहोवा पर भरोसा रखना: परमेश्वर की इच्छा में भरोसा रखना- सच्ची महानता का रहस्य अपनी सब चिन्ताओं, योजनाओं तथा भय से उभरना है। हम अपने स्वयं को अपना भाग्य विधाता समझते है तो अपनी ही समझ का सहारा लेते है। ।
6 उसी को स्मरण करके सब काम करना,
तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।
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