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सूक्ति संग्रह 31

25 वह शकि और समरण िै;

भविआशें उसकउलै.

26 उसकिवतवचन ैं,

उसकवचन ा-िैं.

27 वह अपनपरिगतििि पर िरण रखत

और आलसजन उसकचरें नहीं.

़ौ

28 उठकर उसकलक उसकरशकरतैं;

उसकपति इन शबों ें उसकरशकरतनहीं थकता:

29 "अनिों उतिैं,

िंउन सबसउतो."

30 आकरषण एक और ौंदरगति उडै;

िंिें हवरति रदियमै, वह रशसनरही.

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