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Provérbios 31

1 लमएल रसि ैं, िनकिउनें उनकगई ी.

2 , ! , गरजन!

, थनरततर !

3 अपनिों पर यय करनऔर अपनधन उन पर ा,

िोंतक अवपें िै.

4 लमएल, यह िकदि उपयनहीं ै,

खमधिगत नहीं ै,

सकों िदक रवयपभलनहीं ा.

5 ऐसि कर ं,

और दलिों उनकअधिें.

6 दक रवउनें ो, मरनपर ैं,

खमधउनें ो, मन ें उदैं!

7 ितथअपनिधनत

और उनें उनकदशमरण आएं.

8 उनकपकें खड़े कर उनकिरसकरो,

अपनपकरसकरनें असमरैं.

9 िडरतवक रसकरऔर िपकषपो;

िधनों और िधनों अधिों रककरो.

आल

10 िउपलबउत, णसपन्‍पती?

उसकरतों कहीं अधिबढकर ै.

11 उसकपति उस पर भरकरत

और उसकरण उसकपति अपरििै.

ि

12 वह आजवन अपनपति िकरतै,

कभनहीं.

13 वह कर ऊन और पटसन आत

और हसतकें उसकगहरि ै.

14 िजलयों सम,

वह र-दकर वसरबकरतै.

15 ि सम्‍नहीं ी, ि वह उठ ै;

और अपनपरििजन रबकरत

तथअपनपरििउनकिै.

ईन

16 वह कर िखणपरखतऔर उसै;

वह अपनअरिधन िपण करतै.

़े

17 वह कमर कसकर ततपरतवक ें ै;

और उसकें सशकरहतैं.

18 उसयह रहति उसकांरहे,

ि ें उसकसमि झननहीं ा.

19 वह चरखपर करनिठत

और उसकतकलपर चलनलगतैं.

20 उसकिधनों ओर बढैं

और वह िधनों सहयतकरतै.

21 तकआगमन उसकपरिििंिषय नहीं ा;

ोंि उसकसमसपरििपर्‍ऊनवसरहतैं.

22 वह अपनिऊनवसरखतै;

उसकसभवसउततथभवैं.

23 जब परिषद सतै,

तब रमों ें उसकपति अतरतििै.

24 वह पटसन वसनकर उनकिरय कर ै,

तथिों पटचतै.

अयि

25 वह शकि और समरण िै;

भविआशें उसकउलै.

26 उसकिवतवचन ैं,

उसकवचन ा-िैं.

27 वह अपनपरिगतििि पर िरण रखत

और आलसजन उसकचरें नहीं.

़ौ

28 उठकर उसकलक उसकरशकरतैं;

उसकपति इन शबों ें उसकरशकरतनहीं थकता:

29 "अनिों उतिैं,

िंउन सबसउतो."

30 आकरषण एक और ौंदरगति उडै;

िंिें हवरति रदियमै, वह रशसनरही.

31 उसकपरिरम उसि,

और उसकनगर ें ििं.

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