9 ओह कहिस, "जा, अऊ ये मनखेमन ला कह:
" ‘सुनत ही रहव, पर कभू झन समझव;
देखत ही रहव, पर कभू झन बुझव।’
10 ये मनखेमन के मन ला कठोर,
ओमन के कान ला भारी
अऊ ओमन के आंखीमन ला बंद कर दे।
अइसन झन होवय कि ओमन अपन आंखी ले देखंय,
अपन कान ले सुनंय,
अपन मन म समझंय
अऊ मन फिराके चंगा हो जावंय।"