2 कई ज़ुंण मरी हणैं गऐ दै, तिंयां हणैं भिई। कोऐ भेटणीं सदा लै ज़िन्दगी अर कोऐ हणैं सदा लै शर्मिंदै।12:2 ईशा. 26:19; मोत्त. 25:46; जोह. 5:29 3 ज़ुंण अक्ली आल़ै मणछ होए तिन्नां का लागणअ सरगे तारै ज़िहअ च़लकार। ज़ुंणीं धर्मीं सोभी का धर्म करनअ सखाऊअ, तिंयां बी च़मकणै सदा तिहै ई।12:3 मोत्त. 13:43
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