13 ज़िहअ बी तम्हैं मेरै नाओंए मांगे, मुंह दैणअ तम्हां लै तिहअ ई, ताकि मुंह पूता करै बाबो प्रतप्प शुझिए। 14 ज़ै तम्हैं मुखा मेरै नाओंऐं मांगे, सह हेरनअ मुंह तम्हां लै दैई।
पबित्र आत्मां दैणैंओ बाहिदअ
15 "ज़ै तम्हैं मुंह संघै झ़ूरी डाहा, तै मनणी तम्हां मेरी गल्ला बी। 16 मुंह करनी आपणैं बाब परमेशरा का अरज़ कि तम्हां लै छ़ाड एक होर मज़त करनै आल़अ, ज़ुंण सदा तम्हां संघै रहे।