10 धन नी हाय आखी भाती नी कुहराय ना मुळ्या से; ढेरेत जणा धन हात करवा नी हेर करते-करते भरहा गेथा वीरखाय जेला से, अने तीहया आह़फात भात-भाती नी मंदवाड़ मे पड़ ज्या।
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10 धन नी हाय आखी भाती नी कुहराय ना मुळ्या से; ढेरेत जणा धन हात करवा नी हेर करते-करते भरहा गेथा वीरखाय जेला से, अने तीहया आह़फात भात-भाती नी मंदवाड़ मे पड़ ज्या।