गम धीरज नो बोलावो
1 जां तक आमु गवाय ना एतरा मोटा वादळा सी घेरवाय र्या ता अळतेण आवो रोकावट नाखवा वाळी आखी चीज ने अने तीहया पाप ने आमने भुले पाड़ देय तीने नाख दे, अने तीहयी दवड़ ने जे आमने दवड़वा नी से तीने धीरज सी दवड़े। 2 अमारा भरहा ने बणावण्या अने चोखला करवा वाळा ईसु भणी भाळया। जे आपणी अगळ हजुर खुसी नी लेदे कुरुस ना दुख झेल्यो, तीनी लजवायवा नी कोय चीन्ता नी हय के भगवान नी राजगादी नी जमणी ह़ोड़ जाय्न बह ज्यो।