40 पण मारथा सेवा करती-करती घबराय जी, अने ईसुन्तां आवीन केदी, "ए मालीक! ह़ु तने मारी थोड़ीक बी फीकर नी हय, के मारी बेनेह मरीयम सेवा नो आखो बोज मारीत पोर नाख देदली से? हीने तु आहयु काहा नी केतो के तारी बेनेह ने मदत कर दे।"
40 पण मारथा सेवा करती-करती घबराय जी, अने ईसुन्तां आवीन केदी, "ए मालीक! ह़ु तने मारी थोड़ीक बी फीकर नी हय, के मारी बेनेह मरीयम सेवा नो आखो बोज मारीत पोर नाख देदली से? हीने तु आहयु काहा नी केतो के तारी बेनेह ने मदत कर दे।"