1 दाड़ीन वळ-वळीन वीन्ती करवा जोवे, अने हीय्या नी सोड़वा जोवे, आहयु ह़ीकाड़वा करीन, ईसु आह़फा ना चेला ने आहयो दाखलो ह़मळायो, 2 "काना ह़ेर मे एक नीयाव करन्यो हतो, जे, नी ते भगवान ने बीहत्लो, अने नी ते काना माणहु नी परवाय करत्लो। 3 अने तीहयात ह़ेर मे एक रंडायली बयर बी हती। तीहयी ते नीयाव करन्यान्तां आवीन कीया करती हती, नीयाव करीन मार पोर गुनो लगाड़न्या सी बचाड़ अने मने नीयाव अपाड़। 4 अने तीहयो घणा दाड़ा लग नी मान्यो अळतेण तीहयो आह़फा ना मन मे वीच्यारीन केदो, ‘मे नी ते भगवान सी बीहु, अने नी माणहु नी परवाय करु’ 5 ते बी आहयी रंडायली बयर वळ-वळीन आवे, अने मने दम्या करे; एतरे मे आनो नीयाव करही, जीनी सी हीय्यी, पासी वळ-वळीन नी दमे तेम।"
6 मालीक ईसु केदो, "ह़मळ्या के आहयो वण-धरमी नीयाव करन्यो माणेह ह़ु केदो? 7 एतरे भगवान आह़फा ना टाळला माणहु जुगु, नीयाव करवा वार मे वार लगाड़हे ह़ु? जे रात ने दाड़ो आड़ी-आड़ीन तीनी पांह रावण्या करीन वीन्ती कर्या करे ह़ु तीहयो तीना बारा मे वार लगाड़हे ह़ु? 8 मे तमने केम; तीहयो छोटोत तीमनी जुगु नीयाव करहे। पण जत्यार मनख्या नो सोरो आवह़े, ता तीहयो धरती पोर माणहु मे भरहो बच रेलो देखहे ह़ु?"