10 फर उसन उनत कहय, "जक चकण-चकण भजन कर अर मठ-मठ रस पय, अर जनक खततर कछ तयर नह हय उनक धर भजन समगर भजज; कयक आज क दन महर परभ खततर पवतर स; अर उदस न रह, कयक यहव क आननद थर मजबत गढ स।"
Publicidade
Publicidade
10 फर उसन उनत कहय, "जक चकण-चकण भजन कर अर मठ-मठ रस पय, अर जनक खततर कछ तयर नह हय उनक धर भजन समगर भजज; कयक आज क दन महर परभ खततर पवतर स; अर उदस न रह, कयक यहव क आननद थर मजबत गढ स।"