4 जब तू परमेश्वर के लिए मन्नत माने तो उसे पूरी करने में विलंब न करना, क्योंकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तूने मानी हो उसे अवश्य पूरी करना। 5 मन्नत मानकर पूरी न करने से तो मन्नत न मानना ही अच्छा है।
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4 जब तू परमेश्वर के लिए मन्नत माने तो उसे पूरी करने में विलंब न करना, क्योंकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तूने मानी हो उसे अवश्य पूरी करना। 5 मन्नत मानकर पूरी न करने से तो मन्नत न मानना ही अच्छा है।