30 "प्रभु परमेश्वर की या वानी हय, हे इस्राएल को घराना, मय तुम म सी हर एक आदमी को न्याय ओको चालचलन को अनुसारच करूं। पश्चाताप करो अऊर अपनो सब अपराधों ख छोड़ देवो, तबच तुम्हरो अधर्म तुम्हरो ठोकर खान को कारन नहीं होयेंन। 31 अपनो सब अपराधों ख जो तुम न करयो हय, दूर करो; अपनो मन अऊर अपनी आत्मा बदल डालो! हे इस्राएल को घराना, तुम कहाली मरो? 32 कहालीकि, प्रभु परमेश्वर की वानी हय, जो मरयो हय, उन्को मरन सी मय खुश नहीं होऊ, येकोलायी पश्चाताप करो, तबच तुम जीन्दो रहो।"