छ़ऊई मोहर अर घोर कठण धैल़ी
12 ज़ांऊं तेऊ छ़ऊऐ मोहर खोल्ही, मंऐं भाल़ी एक बडी ज़ाज़री हुई अर सुरज़ हुअ काल़ै दोहल़ू ज़िहअ काल़अ अर पूरी ज़ोथ हुई लोहू ज़ेही लाल।6:12 जोए. 2:10
13 सरगे तारै पल़ै पृथूई दी इहै ज़िहै ढिश-बागर करै पाक्कै दै फेडू धरनीं अल़ा।