1 तेखअ भाल़अ मंऐं एक होर स्वर्ग दूत स्वर्गा का उंधै होथदअ, तेऊओ त बडअ हक भेटअ द अर पृथूई हुई तेऊए झ़ामणा करै प्रैश्शी। 2 तेऊ बोलअ ज़ोरै-ज़ोरै इहअ,
"ढूल़ी गअ, बडी बाबेल नगरी ढूल़ी,
"तिंयां हुऐ हर भूता रहणें बसेरै, अर हरेक छ़ोतलै अर च़िल़्हखरै च़ेल्लू-पखीरूए कोल्ह।
3 "तेसे कंज़रैईए झ़रीली शराबा करै हुई सोभै ज़ाती छ़ोतली।
"पृथूईए राज़ै किई तैहा संघै कंज़रैई अर पृथूईए बपारी हुऐ तैहा संघै भोग करी जोधै अर सेठ।"
4 तेखअ शूणअ मंऐं स्वर्गा का एक होर बोल,
"हे मेरै लोगो, तैहा नगरी का निखल़ा ओर्ही, ताकि तम्हैं तेसे पापा दी साझ़ू नां होए, अर तेसे खरी मांझ़ै तम्हां लै निं एछे।
5 "किल्हैकि तेसे पाप गऐ स्वर्गा तैणीं पुजी अर ज़ुंण तैहा ज़ुल्म किऐ तै तिंयां फिरै परमेशरा आद।
6 "ज़िहअ दुख तैहा तम्हां लै आसा दैनअ द, तिहअ ई दैआ तैहा लै बापस भरी,
"तेसे कामें साबै दैआ तैहा लै दुगणअ बापस भरी।
7 "ज़ेतरी तैहा बड़ैई किई अर सुख-भोग किअ, तेतरी दैआ तैहा लै दाह-दुख अर शोग। किल्हैकि सह बोला आपणैं मन्नैं इहअ,
"‘हुंह आसा राणीं ज़ेही बेठी दी, अर हुंह निं बिधबा आथी अर नां कधि हुंह शोगा दी पल़णीं।’
8 "एकी धैल़ी पल़णीं एता ई पिछ़ू तैहा लै खरी, मतलब मौत, शोग अर नकाल़। संघा हणीं सह आगी जैंदरी भस्सम किल्हैकि,
"तेसो नसाफ करनै आल़अ आसा परमेशर बिधाता सर्वशक्तिमान।
9 "पृथूईए राज़ै, ज़ुंणी तैहा संघै कंज़रैई दी भोग किअ, ज़ांऊं तैहा दझ़णेंओ धूँ तिन्नां भाल़णअ, तिन्नां लाणीं तैहा लै हिक्का पटाक्की करै लेरा।
10 "तेसे दाहे डरै मारै बोल़णअ तिन्नां दूर खल़्हुई करै इहअ,
‘ओ बडी नगरी बाबेल, ओ बडी नगरीऐ,
भाल़ केही आफ़त पल़ी! ताल्है भाल़ केही खरी पल़ी!
हेरा-हेरी भेटी ताल्है
परमेशरा का सज़ा।’
11 "पृथूईए बपारी लाणीं तैहा लै लेरा अर तिंयां चाछल़णैं तैहा लै, किल्हैकि ऐबै निं कोही तिन्नों माल मोल लणअ। 12 मतलब सुन्नअ, च़ंदी, रत्न, मोती, बाछ, बैंज़णीं, रेशमी अर लाल झिकल़ै, अर सोभी रंगे खुशबूदार काठ, हाथी दांदे सोभी रंगे च़िज़ा, किम्मती काठ, पितल़, लोहे अर संगमरमरे सोभी भांतीए भांडै 13 अर दाल़चिनी, मसालै, धूप, खुशबूदार किम्मती तेल, लोवान, दाखो रस, तेल, मैदअ, कणक, गाऊई, बल्द, भेडा, बाकरी, घोल़ै, रथ, दास अर मणछे प्राण।
14 ‘ऐबै ज़हा पाक्कै फल़ा लै तूह झ़ूरा ती, तिंयां डेऊऐ ताखा दूर,
अर बधिया अर शोभली च़िज़ा बी हुई ताखा दूर,
तिंयां निं भिई कधि भेटणीं।’
15 "इना च़िज़े बपारी ज़ुंण तैहा करै सेठ हुऐ तै, तेसे दाहे मारै रहै दूर लेरदै चाछल़दै अर तिन्नां बोल़णअ लेरदी-लेरदी इहअ,
16 ‘भाल़ केही आफ़त पल़ी! बडी नगरी लै भाल़ केही खरी पल़ी!
ज़ुंण बाछे अर बैंज़णीं अर लाल झिकल़ै बान्हीं रहा ती,
सुन्नैं, रत्न अर मोती करै ती सज़ी दी,
17 हेरा-हेरी हुई
तैहा नगरीए खास्सी धन-माया बरैबाद।’
"हरेक पाणींए ज़हाज़े दलपति, ज़हाज़ च़लाऊंणैं आल़ै अर तेथ दी डेऊणैं आल़ै अर ज़ेतरै लोग समुंदरे बाता बपार करा तिंयां सोभै खल़्हुऐ तैहा नगरी का दूर। 18 तेसे दझ़णेंओ धूँ भाल़ी लागणै बोल्दै कि ऐहा नगरी सान महान नगरी निं कोहै आथी!
19 "तेखअ पाणअ आपणैं-आपणैं मुंडै तिन्नां माट्टअ कि तिंयां आसा दुखी अर लेरदी चाछल़दी बोल़णअ तिन्नां लेरदी-लेरदी करै इहअ,
"‘भाल़ केही आफ़त पल़ी! बडी नगरी लै भाल़ केही खरी पल़ी!
"‘ज़सरी धन-माया करै सोभ समुंदरै ज़हाज़ा आल़ै सेठ हुऐ अर सह हुअ घल़ी-पला भितरी बरैबाद।’
20 "‘हे स्वर्ग, ओ पबित्र लोगो, प्रभू ईशूए शधाणूंओ अर परमेशरे गूरो,
"‘तेता लै करा नंद, किल्हैकि परमेशरै लअ नसाफ करी तेऊ का थारअ बदल़अ।’
21 "तेखअ च़कअ एकी जोधै स्वर्ग दूतै एक बडअ घरट, संघा शोटअ इहअ बोली समुंदरै,
"‘बडी नगरी बाबेल शोटणी इहअ ई करै ज़ोरै समुंदरै अर तैहा नगरीओ हणअ सदा लै बनाश।
22 "‘बींन बाज़णैं आल़ै, घैरी, बशूरी बाज़णैं आल़ै अर नाद बाज़णैं आल़ेए छ़ेल़ निं ताखा भिई कधि शुण्हनी।
"‘नां कधि ताह कोई बी च़िज़ा बणाणैं आल़अ अर कारीगीर भेटणअ,
"‘थरेटा फिरनें छ़ेल़ बी निं ताखा कधि शुण्हनी।
23 "‘दीऐओ प्रैश्शअ बी निं कधि ताह दी च़मकणअ अर लाल़ै अर लाल़ीओ बोल बी निं ताखा कधि शुणनअ।
"‘किल्हैकि तेरै बपारी तै पृथूईए प्रधान अर तेरै ज़ादू करै पल़ी ती पृथूईए सोभ ज़ाती कबाता।’
24 "परमेशरे गूरो, पबित्र लोगो अर पृथूई दी मारै दै लोगो लोहू भेटअ तेथै।"