4 एक पोस्ती मुक्का अर
दुजी पोस्ती एछा, पर
संसार रहा सदा ज़िहअ कै तिहअ ई!
5 धैल़अ रहा निखल़दअ अर डुबदअ लागी,
तेऊ हआ तेथ बाखा फिरनेओ छ़ेक्कअ लागअ द
ज़िधा का तेऊ भिई निखल़णअ अर कबल्लअ हआ तेऊओ तिहअ ई काम।
6 बागरी फिरा दखणा बाखा लै,
तेखअ फिरा उतरा बाखा लै,
अह रहा एही ई भिई-भिई
उंधै-उझै फिरदी लागी!
7 सारी गाडा नाल़ी पोछिआ सारी समुंदरै,
पर सह निं कधि भर्हदअ
सह पाणीं पुजा हटी फिरी तिधी
ज़िधा का गाडा नाल़ी लै सोबल़ निखल़ा।