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लुआह 30:1,6-8,10

धूपे बेदी

1 "तेखअ बणाऐं किक्‍करे काठा करै धूप ज़ाल़णा लै एक बेदी।

6 "धूपे बेदी डाहै तूह पबित्र खिम्भा भितरे मांझ़लै पल्दै आजू ज़िधी करारे मणशू प्रैंदै प्राश्तो ढक्‍कण आसा डाहअ द, हुंह करूं ताह संघै तिधी गल्‍ला।

7,8 "आझ़ा बाद, हर धैल़ै दोत्ती-उडै ज़ेभै हारण सदीअ ज़ाल़े, तेभै ज़ाल़ै मुंह बिधाता लै बेदी प्रैंदै शोभली बास्सा आल़अ धूप पोस्ती दर पोस्ती।

10 "हर साल करै हारण धूप बेदीए शींगा दी पशूओ लोहू लेस्सी पापो प्राश्त करना तेता पबित्र, पाप बल़ीए एऊ बधाना करै पोस्ती दर पोस्ती इहअ ई। अह बेदी आसा मुंह बिधाता लै खास पबित्र।"

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