बिधाता करा झींण
12 बिधाता बोला इहअ, ‘ब्रतू रही, लेरा लांदी अर
शोग करदी फिरा मुंह सेटा लै तत्त दिला का बापस।
13 सिधै घेरीए झिकल़ै धेल़ी निं दुख रहैऊंदै लागा,
मुखा लोल़ी शुझुअ कि तम्हैं आसा दिला का दुखी।’
आपणैं परमेशर बिधाता बाखा फिरा!
सह आसा खास्सअ झ़ूरनै अर झींण करनै आल़अ।
सह करा सबर अर आपणीं ज़बान करा सह पूरी।
सह निं झ़ट च़ारै रोश्श करदअ, हाम्हां लै आफ़त पल़दी भाल़ी हआ सह बी दुखी।