1 ज़ुंण शिक्षा लै झ़ूरा, तेऊ सका नैरी समझ़ाऊई बी,
पर ज़ुंण नैरना लै ज़ीद डाहा, सह आसा ऐडअ।
2 भलै मणछा लै झ़ूरा बिधाता बी,
पर ज़ुंण बूरी बिक्री सोठा, तेऊ लै दैआ सह सज़ा।
3 पाप निं फाज़त करी सकदअ,
पर धर्मीं ज़िन्दगी ज़िऊंणै आल़अ मणछ हआ इहै बूटा ज़िहअ
ज़ेते ज़लैल़ै कुंण पेच़ी निं सकदअ।
4 भली बेटल़ी हआ आपणैं मर्धे मुंडा लै मुगटा ज़ेही,
पर नबिज़तै काम करनै आल़ी बेटल़ी हआ एही बमारी ज़ेही ज़ुंण हाडकै दैआ चजेऊई।
5 भलै मणछा भली सोठ,
पर कदुष्ट मणछ दैआ धोखअ ई।
6 कदुष्ट मणछे सलाह हआ हत्या करनै आल़ै ज़ेही,
पर धर्मीं मणछे बैण हआ होरी लै आफ़ता का छ़ड़ैऊंणैं आल़ै।
7 कदुष्ट मणछ हआ पठी बरैबाद, तिन्नें निं आजू आद-लुआद बी रहंदी,
पर धर्मीं मणछे आद-लुआद रहा बढदी लागी।
8 ज़हा का अक्ल हआ, तेऊ सराहा सोभै,
पर ज़ुंण ऐडअ होए, तेऊ समझ़ा सोभै बृथा।
9 ज़हा मणछा का बैल़ी खाई क्लारी निं आथी,
पर आपणैं बारै सेखी फणाटा सह बडी-बडी!
तेऊ इहै मणछा का राम्बल़अ आसा सह आम मणछ ज़ुंण आपणअ पेट, धाचा।
10 धर्मीं मणछा हआ आपणैं डागै-धणे बी फिकर,
पर कदुष्ट मणछ हआ नर्दैई।
11 ज़ुंण खेचै खटा, तेऊ का हणअ खाणां पिणां लै रज्ज़ी,
पर निक्की संगती दी बगत ज़ांऐं करनअ हआ ऐडी गल्ल।
12 कदुष्ट मणछा हआ किज़ै नां किज़ै कबध करना लै ठुर्हा लागी दी,
पर धर्मीं मणछ रहा इहै बूटा ज़िहअ पाक्कअ टेक्की ज़ेते ज़लैल़ै डुघै हआ।
13 कदुष्ट मणछा लै हआ तेऊए आपणीं ई बोली दी झ़ुठी गल्ला फाही,
पर मानदार मणछ जाआ आफ़ता का बच़ी।
14 मणछा भेटा आपणैं बोल अर कर्मे साबै फल,
सह ज़िहअ कर्म करा, फल बी भेटा तेऊ तिहअ ई।
15 ऐडै मणछ सोठा हर बगत इहअ कि तिंयां ई आसा ठीक,
पर अक्ली आल़ै मणछ दैआ दुजे सलाह दी धैन।
16 ऐडअ मणछ जाआ हेरा-हेरी रुश्शी,
पर सोर-समझ़ हुई, सह काढा आपणीं बेइज़ती बी ज़िरी।
17 मानदार शाजत खोज़ा दालता दी शुची गल्ला,
पर झ़ुठअ शाजत खोज़ा झ़ुठी गल्ला।
18 बच़ार किऐ बाझ़ी बोलै दै बैण च़ुभा तलबारा ज़िहै,
पर अक्ली आल़ै मणछे बोल लाआ मल्हम।
19 झ़ुठ हआ थोल़ी घल़ी लै,
पर सत्त रहा सदा बणी।
20 कदुष्ट मन्न हआ ठग,
पर मेल़-ज़ोल़ करनै आल़ै भेटा खुशी।
21 भलै मणछा निं आफ़त पल़दी,
पर कदुष्टा निं आफ़ता का सुआई होर भेटदअ ई आथी।
22 शल़ैघा घल़णै आल़ै मणछा का करा बिधाता नफरत,
पर ज़ुंण शुची-पाक्की ज़बान दैआ, तेऊ लै हआ सह खुश।
23 अक्ली आल़ै मणछा का हआ ज्ञैन पर तेता निं सह होरी का रहैऊंदअ फिरदअ,
पर ऐडअ मणछ खोज़ा आपणीं ऐडी गल्ला सारै दी।
24 मैन्थ करनै आल़ै मणछ करा राज़,
पर ज़ैऊंकर मणछा लागा लोगे गलामी करनी।
25 मन्नों फिकर करा मणछा धिठै,
पर एक भली गल्ला करै हआ तेऊ उझै।
26 धर्मीं मणछ पाआ आपणैं साथी-संघी बी राम्बल़ी बाता,
पर कदुष्ट मणछे बात करा तिन्नां बरैबाद।
27 ज़ैऊंकर मणछा निं ज़िहअ सह च़ाहा, तिहअ कधि भेटदअ,
पर मैन्थ करनै आल़ै झाल़ा खज़ानै।
28 धर्मीं बाता भेटा ज़िन्दगी,
सह बात निं मौता बाखा डेऊंदी ज़ेथ कदुष्ट पेठा।