1 ज़हा बेटल़ी अक्ल हुई सह बणाआं आपणअ बसेरअ,
पर कबुधी ऐडी बेटल़ी खोआ आपणअ घअर आपणैं हाथै।
2 मानदारी रहैऊआ ऐहा गल्ला कि तम्हैं करा बिधातो अदर,
पर विश्वास घात करा ऐहा गल्ला प्रगट कि तम्हैं निं बिधाता बी मंदै।
3 घमंडी ऐडअ पाआ बडी-बडी डिंगा मारी आप्पू लै आफ़त,
पर अक्ली आल़ै मणछे बैण करा तेऊए आपणीं फाज़त।
4 बल्दा बाझ़ी हआ खहल़ रित्तअ,
किल्हैकि तेऊ बाझ़ी निं साल-फसल हंदी।
5 मानदार शाजत निं झ़ुठअ बोल्दअ,
पर झ़ुठअ शाजत घल़ा शल़ैघा ई।
6 ज़ुंण हर गल्लो सुहांग करा, तिन्नां निं अक्ल एछी सकदी,
पर समझ़कार मणछ जाआ छ़ेक्कै समझ़ी।
7 ऐडै मणछे संगती का रहणअ दूर,
तिन्नां का निं शिखल़णा लै किछ़ै भेटदअ।
8 ज़हा सोर-समझ़ हुई सह आसा अक्ली आल़अ, किल्हैकि तेऊ का हआ थोघ कि किज़ै करनअ,
पर ऐडै मणछे कबुध दैआ तेऊ लै धोखअ।
9 ऐडअ मणछ निं आपणैं पापे परबाह करदअ,
पर भलै मणछ च़ाहा माफ करी मेल़-ज़ोल़ करनअ।
10 दुख अर सुख हआ दुहै गल्ला आपणीं,
तेथ निं कोहै तम्हां संघै साझ़ करी सकदअ।
11 धर्मीं मणछो घअर रहअ फल़दअ-फुलदअ लागी,
पर कदुष्ट मणछो घअर हआ बरैबाद।
12 एक बात हआ एही बी ज़ुंण मणछा का भली ज़ाण्हिंआं,
पर सह सका मौते दुआरै बी पजैल़ी।
13 हास्सी-खुशी पिछ़ू सका दुख लुक्की,
पर ज़ांऊं हास्सी-खुशी मुक्का, तेखअ शुझिआ सह दुख तिधी।
14 ज़िहअ बऊअ, लऊंणा लै बी भेटा तिहअ ई,
च़ाऐ सह भलअ होए या बूरअ।
15 ऐडअ मणछ फिरा कज़ेथै बाखा लै,
पर ज़हा सोर-समझ़ हुई सह मणछ करा बच़ार कि अह बात केथ बाखा लै डेओआ।
16 अक्ली आल़अ मणछ डाहा धैन, सह हेरा ज़ाणीं कि आफ़त च़ाल्ली पल़ी,
पर ऐडै मणछ हआ निहंचै बेठै दै! तिंयां निं तेतो धैन ई डाहंदै।
17 ज़हा धखी का रोश्शै एछा, तिंयां करा ऐडी गल्ल,
पर ज़हा सोर-समझ़ हुई सह करा बच़ार।
18 कबुधी कराऊआ ऐडै काम,
पर ज़हा सोर-समझ़ हुई, तेऊ का हआ ज्ञैन बी।
19 बूरै मणछा लागा भलै सेटा अर कदुष्ट मणछा लागा
धर्मीं मणछा सेटा मुंडकी ढोल़ी मज़त मांगणी।
20 दाल़जी मणछा निं तेऊए साथी-संघी बी च़ाहंदै,
पर सेठ मणछे हआ खास्सी साथ-संगत।
21 ज़ै तम्हैं खुश रहणअ च़ाहा, तै हणअ गरीबा लै झणैल़ू,
किल्हैकि होरी लै नफरत करनी हआ पाप ई।
22 ज़ै तम्हैं भलअ करे, तेता करै खटणअ तम्हां होरीओ भरोस्सअ अर अदर,
पर थारै कदुष्ट काम करनै आसा थारी महान गलती।
23 ज़ै तम्हैं मैन्थ करे, तेता करै हआ सदा नफअ ई,
पर बृथा गल्ला दी बगत ज़ांऐं करी एछा गरीबी।
24 अक्ल सका तम्हां सेठ बणाईं,
पर ऐडी गल्ला करै हआ कबुध ई पैईदा।
25 शाजत बच़ाऊआ शुची गल्ला खोज़ी करै कई ज़िन्दगी,
पर शल़ैघा घल़णै आल़अ दैआ लोगा लै धोखअ।
26 बिधातो अदर करी एछा भरोस्सअ,
तेता करै हआ तेऊ मणछ अर तेऊए टबरे फाज़त अर तेथ भेटा तेऊए लान्हैं सुन्हैं बी शरण।
27 ज़ै तम्हैं मौता का बच़णअ च़ाहा,
तै करा बिधातो अदर, किल्हैकि सह आसा एही सोबल़ा ज़ेही ज़ुंण ज़िन्दगी दैआ।
28 राज़अ महान आसा कि नांईं, तेतो थोघ लागा इहअ करै कि सह केतरै लोगा प्रैंदै करा राज़,
बाझ़ी परज़ा आसा राज़अ बी बृथा।
29 ज़ुंण सबर करा, सह हआ समझ़कार,
पर ज़हा धखी का रोश्शै एछा, सह हआ ऐडअ ई।
30 शांत मन्न डाही एछा देही बी त्राण,
पर ज़ीद-मिश हआ हाडकै चजेऊणैं आल़ी बमारी ज़ेही।
31 ज़ुंण गरीबा छेऊआ, सह करा तेऊ बिधाता नकदरै ज़ुंणी तिंयां बणाऐं,
पर गरीबा लै झणैल़ू हणअ हआ बिधाते च़ाकरी करनै बराबर।
32 कदुष्ट मणछ हआ आपणैं ई कदुष्ट कामां करै बरैबाद,
पर धर्मीं मणछे आशा निं मरदी-मरदी बी चुटदी।
33 समझ़कार मणछा का हआ अक्लीओ थोघ,
पर ऐडै मणछा निं अक्लीए बारै थोघ ई हंदअ।
34 ज़ेऊ देशै परज़ा धर्मीं ज़िन्दगी ज़िऊआ, तेता करै हआ सह देश महान,
पर पापी करै पल़ा सारै देशा शर्मिंदै हणअ।
35 राज़े कार-करिंदै मांझ़ै ज़ुंण अक्ली आल़ै काम करा, तिन्नां लै हआ सह खुश,
पर ऐडै काम करनै आल़ै लै दैआ सह सज़ा।