होर सैणीं गल्ला
7 हे बिधाता, मेरी आसा ताखा एही अरज़ कि
तूह लअ मेरै मरनै का आजी मुल्है दूई बअर दैई।
8 हुंह लोल़ी पठी मानदार हुअ,
नां मुंह खास्सअ सेठ बणाईं अर नां खास्सअ गरीब।
मेरी लोल़ी सिधी हर धैल़ै ज़रुरत पूरी हुई।
9 इहअ निं हआ कि हुंह रज्ज़ी करै ताह बिस्सरी पाए,
अर इहअ बी निं लोल़ी हुअ कि मुंह दाल़ज पल़े अर मेरै भलै किधी च़ोरी होए अर ताह बिधाते नाओंआं दी दाग लागे!"