5 अक्ल अर सुंबल़ी सोर डाह!
ज़ुंण हुंह बोला तेता डाहै आद, बिस्सरी निं आथी।
6 नसकलअ निं हई,
अक्ली लै झ़ूर तेता करै हणीं तेरी फाज़त।
7 सोभी का बडी आसा अक्ल,
तैही दैणअ अक्ल पाणा लै ज़ोर,
होरी सोभी गल्ला भेटणैं का खास आसा समझ़ भेटणीं।
8 अक्ली लै झ़ूर तेता करै हणीं ताह उझै।
अक्ली दी रह मल़्हैछुई तेता करै हणअ तेरअ अदर।