1 मुर्ती पोर चड़ावलु खाणु ना बारा मे तमारु ह़ु केवु पड़े: "आमु आखा अक्कल वाळा से" आहयी वात नो आहयो जपाप से के अक्कल माणहु ने मोटाय करावे। पण मोंग सी आखा नो फायदो हये। 2 कानो वीच्यार करे के थोड़ाक जणा, जीसम जाणवा जोवे, तेम तीमने हजु लग मालम नी हय। 3 पण जे कोय भगवान ने मोंग करे तीने भगवान जाणे।
4 एतरे मुर्ती पोर चड़ावलु खाणु ना बारा मे आपणु ने मालम से के आहयी कळी मे जीवत्ली मुर्ती कंखर नी हय, अने एक ने सोड़ीन कानो बी जीवत्लो भगवान नी हय। 5 माणहु केय के ह़रग अने धरती पोर घणा जादा "देवता" से अने घणा "मालीक" से। 6 पण आपणी जुगु ते एकीत भगवान से, जे अमारो बाह से। अने तीनी वगे गेथु जे से तीहयु आखु आवे। अने आपणु तीनीत जुगु जीवया। अने एकीत मालीक से अने तीहयो ईसु मसी से, जीनी लारे आखी चीज घड़ाय अने आपणु तीनीत लारे घड़ायला से।
7 पण आखा ने आहयी वात मालम नी हय। काना ते हंजु लग मुर्ती ने जीवत्ली ह़मजी र्या, अने तीनी पोर चड़ावलु खाणु ने ह़ाचलीन बरकत वाळु से ह़मजीन खाय। अने तीमनो जीव कमजोर हयवा सी वीटळ जाय। 8 पण मुर्ती पोर चड़ावली चीज ते आपणु ने भगवान ह़ाते नी ली जाय। कदीम आपणु तीहयु खाणु ने नी खाया ता आपणु कंय बी नुकसान नी हये, अने कदीम खाया, ता कंय बी फायदो नी हय।
9 चेतीन रेवो, कंखर माय्न तमारो खावा नो हक, भरहा मे कमजोर माणहु ने पाप मे नी पाड़ देय। 10 काहाके कदीम कानो तमारी ह़रका अक्कल वाळा ने मंदीर मे खाणु खातलो देख लेय, तीने तारीन तेम मंदीर मे चड़ावलु चीज ने खावा नी हीमम्त हय जहे? अने ईसम करीन तीहयो मुर्ती पोर चड़ावली चीज ने खाय्न पाप मे पड़ जहे। 11 आहयी रीते तारी अक्कल नी लेदे कमजोर मन नो भाय खुट जहे, जीनी जुगु ईसु मसी मर्यो। 12 ईसम करीन तमु भाय ना वीरोद मे पाप करो अने तीना कमजोर मन ने दुखी करीन ईसु मसी ना वीरोद मे पाप करो। 13 एतरे कदीम मारु माह खाणु भाय जुगु पाप नो कारण बणे, ता मे जलम माह नी खाम।