1 आह़फा नो रोट्लो पाणी पोर नाख दे, काहाके घणा दाड़ा बाद तु तीने पासो हात करही। 2 ह़ात जणा ने नी पण आंठ जणा ने वाटो आप, काहाके तु नी जाणतो के धरती पोर कत्यार गरा आय पड़े। 3 कदी वादळा पाणी सी भरायला हय ता पाणी धरती पोर पड़ जाय; अने झाड़ भले दखणाव भणी पड़े नीता धुराव भणी पड़े ते बी जे जागा पोर झाड़ पड़हे, तीहयात जागा पोर पड़ रेहे। 4 जे वाहळु ने झाकतो रेहे तीहयो बीज वेरी नी सके, अने जे वादळा ने देखतो रेहे तीहयो मेर वाडी नी सके। 5 जीसम तु वाहळु नो जवा नो रोहो नी जाणतो अने कानी रीते भारेपोगे बयर ना पेट मे सोरुन अंग वदे नी जाणतो, तेमेत तु भगवान ना काम ने बी नी जाणतो जे आखु कंय करे। 6 ह़वारे परगण फाटे बीज वेर, अने ह़ांतो बी तारो हात ना रोके; काहाके तु नी जाणतो के कानु काम मे फायदो हयहे, आहयु के ह़ेलु नीता बेम काम वारु नीकळहे। 7 वीजाळु मन-गमतु रेय, अने तोप ने देखवा सी डोळा ने सुक-सांती जड़े। 8 कदी माणेह घणा साल जीवतो रेय, ता तीहया आखा सालु मे खुस रेवा जोवे; पण आहयु बी फोम राखवा जोवे के अंदारला ना दाड़ा बी घणा हहे। जे कंय हये तीहयु फालतु से।
9 ए जुवान, तारी जुवानी मे मजा कर, अने तारी जुवानी ना दाड़ा मे खुस रे; तने जे गमे तीहयु कर अने तारा डोळा नी नींगान अनसारे चाल। पण आहयु आखु फोम राखजे के भगवान आहयी आखी वातु ना बारा मे तारो नीयाव करहे। 10 तारा मन सी वेला अने दुख ने सेटो कर, काहाके बचपन अने जुवानी बेम फालतु से।