1 जत्यार तु भगवान ना मंदीर मे जाय, ता चेतीन चालजे; ह़मळवा ना लेदे ह़ाते जजे वण-अकल्या ने बादा चड़ाव्वा सी वारु से; काहाके तीहया नी जाणे के बुरु कर र्या। 2 वात करवा मे उतवाळ नी करजे, अने नी आह़फा ना मन नी वात उतवाळ मे भगवान अगळ नीकाळजे, काहाके भगवान ह़रग मे से अने तु धरती पोर से; आनी लेदे तारा बोल थोड़ाक रेवा जोवे। 3 काहाके जीसम जादा काम ना कारण सी ह़पना देखे, तेमेत जादात वात करवा वाळो वण-अकल्यो ठेरे। 4 जत्यार तु भगवान ना लेदे मान-बादा लेय, ता तीने पुरी करवा मे वार नी लगाड़जे; काहाके तीहयो वण-अकल्या सी खुस नी हये। जे बादा तु लेदो हय तीने पुरी करजे। 5 मान-बादा लीन पुरी नी करवा सी मान-बादा नी लेवात वारु से। 6 कोय बोल कीन आह़फा ने पाप मे नी फसाड़जो, अने ह़रग दुत अगळ आहयु केजो के आहयु भुल सी हयलु से; नीता भगवान तमारी अवाज ह़मळीन खीजवाय अने तारा हात ना कामु ने खत्तम कर देय। 7 काहाके माणेह जादा सी जादा ह़पना देखे, ता तीनी फालतु वातु बी बड़ जाय, पण तु भगवान नी बीक मानजे।
8 कदी तु काना परगणा मे गरीब ने वेला पाड़त्लो अने नीयाव अने सच्चाय ने बगाड़त्लो देखे, ता घबरायजे नी; काहाके एक अदीकारी गेथो मोटो बीजो अदीकारी रेय जीने आहयी वात नी फोम रेय, अने तीनी गेथो बी एक अळी मोटो अदीकारी रेय। 9 खेतर नी मेर आखा जुगु से, नीता खेतर सी राजा नु बी काम नीकळी जाय। 10 जे रुप्या सी मोंग करे तीहयो रुप्या सी आफरे नी; अने जे धन सी मोंग करे, तीहयो बी आफरे नी, आहयु बी फालतु से। 11 जत्यार माल-धन बड़े ता तीने खावा वाळा बी बड़े, ता तीना मालीक ने आने छोड़ीन बीजो ह़ु फायदो हये? आतरुत के तीहया माल-धन ने आह़फा ना डोळा सी देखे। 12 मेहनत करवा वाळो भले थोड़ुक खाय नीता जादा खाय, ते बी तीने नींदर वारु आवे; पण पोमत्ला नु माल-धन बड़वा ना कारण तीने नींदर नी आवे। 13 में धरती पोर एक मोट्ली बुरी वात देखलो से, के माल-धन नो मालीक धन ने आह़फा ना नुकसान नी लेदे एक्ठु करे, 14 अने तीहयु काना बुरा काम मे उड जाय, अने तीना घोर सोरो पयदा हये पण तीना हात मे कंय बी नी रेय। 15 जीसम तीहयो आह्य ना पेट मे गेथो पयदा हयो तेमेत पासो नांगरलो जत रेहे, अने तीहयो आह़फा ना हात मे तीनी मेहनत नो फोळ कंय बी नी लीन जाय सके। 16 आहयी बी एक घणी बुरी वात से के जीसम तीहयो आयो तेमेत तीहयो पासो जहे; तीने तीहयी फालतु मेहनत सी ह़ु फायदो से? 17 तीहयो फालतुत मेहनत कर्यो, तीहयो आह़फा नी पुरी जीवाय नीरासा मे, दुख मे, मंदवाड़ मे अने रीह मे जीव्यो। 18 ह़मळ, जे भलाय नी वात में देखलो से, जे करवा जोवे तीहयी आहयी से के माणेह खाय-पीय अने आह़फा नी मेहनत सी जे तीहयो धरती पोर करे, आह़फा नी आखी जीवाय मे जे भगवान तीने आपली से, सुक-सांती सी रेवा जोवे काहाके तीनो वाटो आहयोत से। 19 हरेक माणेह जीने भगवान माल-धन आपलो से, तीनी सी सुक करवा अने तीनी मे गेथो तारो भाग लेवा अने मेहनत करतो जाय्न खुस रेवा नी ताखत बी आपली से: आहयोत भगवान नो दान-वरदान से। 20 माणेह आह़फा नी पुरी जीवाय ने हमेसान करते फोम नी राखे, काहाके भगवान तीहया माणेह ने तीहया काम मेत लगाड़ीन राखे, जे कामु ने करवा मे तीहयो माणेह मन लगाड़े।