41 मालीक ईसु तीने जपाप आप्यो, "मारथा, ए मारथा! तु ढेरेत वात ना बारा मे फीकर करीन दुखी हये, 42 पण तारी मे एक वात नी कसर से, अने मरीयम तीहयी एक वारली वात ने टाळ लेदली से: जे वात तीनी पांह गेथी कोय नी हापकी सके।"
41 मालीक ईसु तीने जपाप आप्यो, "मारथा, ए मारथा! तु ढेरेत वात ना बारा मे फीकर करीन दुखी हये, 42 पण तारी मे एक वात नी कसर से, अने मरीयम तीहयी एक वारली वात ने टाळ लेदली से: जे वात तीनी पांह गेथी कोय नी हापकी सके।"