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9 नौजवान अपनी राह को किस तरह पाक रखे? इस तरह कि तेरे कलाम के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारे।
10 मैं पूरे दिल से तेरा तालिब रहा हूँ। मुझे अपने अहकाम से भटकने न दे।
11 मैंने तेरा कलाम अपने दिल में महफ़ूज़ रखा है ताकि तेरा गुनाह न करूँ।
12 ऐ रब, तेरी हम्द हो! मुझे अपने अहकाम सिखा।
13 अपने होंटों से मैं दूसरों को तेरे मुँह की तमाम हिदायात सुनाता हूँ।
14 मैं तेरे अहकाम की राह से उतना लुत्फ़अंदोज़ होता हूँ जितना कि हर तरह की दौलत से।
15 मैं तेरी हिदायात में महवे-ख़याल रहूँगा और तेरी राहों को तकता रहूँगा।
16 मैं तेरे फ़रमानों से लुत्फ़अंदोज़ होता हूँ और तेरा कलाम नहीं भूलता।
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