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ज़बूर 58

तक़ा

1 ऊद नहऱी हनितर: तबकर

मरो, ुंि़ा़ैसलकरते, िनतदआदमज़ाों अदलत करतो?

2 हरगिनहीं, िें बदकरतऔर ें अपऩािों िबनो।

3 इश सहगए ैं, लनाँ भटक गए ैं।

4 वह ाँतरह हर उगलतैं, उस बहरतरह अपनों कर रखत

5 ि गर आवे, िसप

6 अल, उनकुँाँ! रब, जवरबबरों जबड़े कर!

7 वह उस तरह ़ाबहकर ़ायब ै। उनकचलअसर रहें।

8 वह ें ोंिंों चलतचलतिघल ै। उनकउस बचा-ाँ ें ़ाकर कभरज नहीं ा।

9 इससपहलि ें ाँटहनिों आग महसकरें अलउन सबकें उड़ाकर एगा।

10 आख़िरकमन सज़ा िी। यह खकर तब़ुा, और वह अपनाँों ों ़ूें ा।

11 तब कहेंे, "तबअजिलतै, अलिें ों अदलत करतै!"

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