12 "पर बुद्धि कित्त मिल सकै सै?
अर समझ की जगहां कित्त सै?
13 उसकी किम्मत माणस नै न्ही बेरा,
जीवन लोक म्ह वो किते न्ही मिलदी!
20 फेर बुद्धि कित्त मिल सकै सै?
अर समझ की जगहां कित्त?
21 वो सारे प्राणियाँ की आँखां तै छिपी सै,
अर अकास के पन्छियाँ कै देक्खण म्ह न्ही आन्दी।
23 "पर परमेसवर उसकी राह समझै सै,
अर उसकी जगहां का उस नै बेरा सै।
28 फेर उसनै माणस तै कह्या,
‘देख, प्रभु का भय मानणा याए बुद्धि सै
अर बुराई तै दूर रहणा याए समझ सै।’"