1 "मेरी जान लिकड़ण पै सै, मेरी जिन्दगी के दिन पूरे होगे सै;
मेरै खात्तर कब्र तैयार सै।
2 जरुर जो मेरे गैल सै वोए मजाक करण आळे सै,
अर उनका झगड़ा-रगड़ा मन्नै लगातार दिखाई देवै सै।"
3 जमानत दे, अपणे अर मेरे बीच म्ह तू ए जमानती हो;
कौण सै जो मेरे हाथ पै हाथ मारै?
4 तन्नै उनका मन समझण तै रोक्या सै,
इस करकै तू उननै हावी न्ही होण देगा।
5 जो अपणे दोस्तां नै चुगली खाकै लूटा देवै,
उसके बाळकां की आँख रह जावैगी।
6 उसनै इसा करया के सारे लोग मेरी मिसाल देवै सै;
अर लोग मेरै मुँह पै थूक्कै सै।
7 दुख के मारे मेरी आँखां म्ह धुँधळापण छाग्या सै,
अर मेरे सारे अंग छाया की तरियां होगे सै।
8 इसनै देखकै सीध्धे लोग हैरान होवै सै,
अर जो बेकसूर सै, वो भगतिहीन कै खिलाफ भड़क उठ्ठे सै।
9 फेर भी धर्मी माणस अपणा राह पकड़े रहवैगें,
अर शुद्ध काम करण आळे सामर्थ्य पै सामर्थ्य पान्दे जावैंगे।
10 थम सारे के सारे मेरै धोरै बोहड़कै आओ तो आओ,
पर मन्नै थारे म्ह एक भी अकलमंद ना मिलैगा।
11 मेरे जीवन के दिन तो बीतगे, अर मेरी इच्छा मिटगी,
अर जो मेरे मन म्ह था, वो नाश होया सै।
12 वे रात नै दिन ठहरावै;
वे कहवैं सै, अँधेरे कै धोरै चान्दणा सै।
13 जै मेरी आस या हो के अधोलोक मेरा धाम होवैगा,
जै मन्नै अँधेरे म्ह अपणा बिछोणा बिच्छा लिया सै,
14 जै मन्नै सड़ाहट तै कह्या, "तू मेरा बाप सै,"
अर कीड़े तै, "तू मेरी माँ," अर "मेरी भाण सै,"
15 तो मेरी आस कड़ै रही?
अर मेरी आस किसके देक्खण म्ह आवैगी?
16 "वा तो अधोलोक म्ह उतर ज्यागी,
अर उस समेत मन्नै भी माट्टी म्ह आराम मिलैगा।"