1 फेर अय्यूब नै कह्या,
2 "मेरी कुड़कुड़ाहट इब भी न्ही रुक सकदी,
मेरी मुसीबत मेरे कराहण तै भी भारी सै।
3 भला होन्दा, के मै जाणदा के वो कित्त मिल सकै सै,
फेर मै उसकी बैठण की जगहां ताहीं जा सकदा!
4 मै उसकै स्याम्ही अपणा मुकद्दमा पेश करदा,
अर भोत सारे सबूत देन्दा।
5 मै जाण लेन्दा के वो मेरे ताहीं जवाब म्ह के कह सकै सै,
अर जो कुछ वो मेरे तै कहन्दा वो मै समझ लेन्दा।
6 के वो अपणी बड़ी ताकत दिखाकै मेरे ताहीं मुकद्दमा लड़दा?
ना, वो मेरे पै ध्यान देन्दा।
7 सज्जन उसतै विवाद कर सकदे,
अर इस रीति मै अपणे न्यायी के हाथ तै सदा की खात्तर छूट जान्दा।"
8 "देक्खो, मै आग्गै जाऊँ सूं पर वो न्ही मिलदा;
मै पाच्छै हटू सूं, पर वो दिखाई न्ही देन्दा;
9 जिब वो ओळी ओड़ काम करै सै फेर वो मन्नै दिखाई न्ही देन्दा;
वो तो सोळी ओड़ इसा छिप जावै सै, के मन्नै वो दिखाई न्ही देन्दा।
10 पर वो जाणै सै, के मै किसी चाल चल्या सूं;
अर जिब वो मन्नै ता लेवैगा फेर मै सोन्ने की तरियां लिकडूँगा।
11 मेरे पैर उसकी राह म्ह टिके रहै;
अर मै उस्से का राह बिना मुड़े थाम्मे रहया।
12 उसके हुकम का पालन करण तै मै न्ही हटया,
अर मन्नै उसके वचन अपणी इच्छा तै
भी घणे काम के जाणकै सुरक्षित राक्खे।
13 पर वो एके बात पै अड़या रहवै सै,
अर कौण उस नै उसतै मोड़ सकै सै?
जो कुछ उसका जी चाहवै सै वोए वो करै सै।
14 जो किमे मेरे खात्तर उसनै ठाण्या सै,
उस्से नै वो पूरा करै सै;
अर उसके मन म्ह इसी-इसी भोत सी बात सै।
15 इस करकै मै उसके स्याम्ही घबरा जाऊँ सूं;
जिब मै सोचुँ सूं फेर उसतै काँम्ब उठूँ सूं।
16 क्यूँके मेरा मन परमेसवर नै ए कच्चा कर दिया,
अर सर्वशक्तिमान नै ए मेरे ताहीं घबरा दिया सै।
17 क्यूँके मै अन्धेरै तै घिरया होया सूं,
अर घणे अन्धेरै नै मेरे मुँह ताहीं ढक लिया सै।"