एहूद का चरित्र
12 फेर इस्राएलियाँ नै फेर यहोवा की नजर म्ह बुरा करया; अर यहोवा नै मोआब के राजा एग्लोन ताहीं इस्राएल पै प्रबल करया, क्यूँके उननै यहोवा की नजर म्ह बुरा करया था। 14 फेर इस्राएली अठारह साल ताहीं मोआब के राजा एग्लोन के अधीन म्ह रहे।
15 फेर इस्राएलियाँ नै यहोवा की दुहाई दी, अर उसनै गेरा के बेट्टे एहूद नाम के एक बिन्यामीन ताहीं उनका छुड़ाण आळा ठैहराया; वो खबची था। इस्राएलियाँ नै उसे के हाथ तै मोआब के राजा एग्लोन कै धोरै कुछ भेंट भेज्जी। 16 एहूद नै एक हाथ लाम्बी एक दोधारी तलवार बणवाई थी, अर उसनै उस ताहीं कपड़यां कै तळै अपणी दाहिनी जाँघ पर लटका लिया। 20 फेर एहूद उसकै धोरै गया; वो तो अपणी एक हवादार अटारी म्ह एक्ला बैठा था। एहूद नै कह्या, "परमेसवर की और तै मन्नै तेरै तै एक बात कहणी सै।" फेर वो गद्दी पै तै उठ खड्या होया। 21 इतणे म्ह एहूद नै अपणा खब्बा हाथ बढ़ाकै अपणी दाहिनी जाँघ पै तै तलवार खींचकै उसकी पेट म्ह घुसेड़ दी; 22 अर तलवार कै बाद मूठ भी बैठगी, अर तलवार चर्बी म्ह धँस्सी रही, क्यूँके उसनै तलवार ताहीं उसके पेट म्ह तै ना लिकाड़या; बलके वा उसके आर-पार लिकड़ गई। 23 फेर एहूद छज्जे तै लिकड़कै बाहर गया, अर अटारी के किवाड़ खींचकै उन ताहीं बन्द करकै ताळा लगा दिया।
24 उसके लिकड़कै जान्दे ए राजा के दास आए, तो के देक्खै सैं, के अटारी के किवाड़ां म्ह ताळा लागरया सै; इस करकै वे बोल्ले, "जरुर वो हवादार कोठड़ी म्ह लघुशंका करदा होवैगा।" 25 वे बाट देखदे-देखदे थकगे; फेर यो देखकै के वो अटारी के किवाड़ न्ही खोल्दा, उननै चाबी लेकै किवाड़ खोल्ले तो के देख्या, के उनका स्वामी धरती पै मरया पड़या सै।
30 इस तरियां उस बखत मोआब इस्राएल के हाथ कै तळै दब ग्या। फेर अस्सी साल ताहीं देश म्ह शान्ति बणी रही।