4 "जिब मन्नै धरती की नीम गेरी, तब तू कित्त था?
जै तू समझदार हो तो जवाब दे।
8 "फेर जिब समुन्दर इसा फूट लिकड़या तो मान्नो वो गर्भ तै फूट लिकड़या,
फेर किसनै दरबाजा बन्द करकै उस ताहीं रोक दिया;
31 "के तू कचपचिया का गुच्छा गूँथ सकै
या मृगशिरा के बन्धन खोल सकै सै?
41 फेर जिब काग के बच्चें परमेसवर की दुहाई देन्दे होए बिना खाये-पीये उड़दे फिरैं सै,
फेर उननै खाणा कौण देवै सै?"