च्यार रथां का दर्शन
1 मन्नै फेर आँख ठाई, अर के देख्या के दो पहाड़ां कै बीच तै च्यार रथ चाल्ले आवैं सैं; अर वे पहाड़ पीतळ के सै। 2 पैहले रथ म्ह लाल घोड़े अर दुसरे रथ म्ह काळे, 3 तीसरे रथ म्ह धोळे अर चौथे रथ म्ह चितकबरे अर बादाम्मी6:3 प्रका. 6:2,4,5,8; 19:11 घोड़े सैं। 4 फेर मन्नै उस दूत तै जो मेरे ताहीं बताण लागरया था, पूच्छया, "हे मेरे स्वामी, ये के सैं?" 5 दूत नै मेरे तै कह्या, "ये अकास की च्यांरु हवा6:5 च्यांरु हवा यानिके च्यांरु दिशा या आत्मा सै जो सारी धरती के प्रभु कै धोरै हाजिर रहवै सै, पर इब लिकड़ आए सैं। 6 जिस रथ म्ह काळे घोड़े सैं, वो उत्तर देश की और जावै सै, अर धोळे घोड़े पश्चिम की और जावैं सै, अर चितकबरे घोड़े दक्षिण देश की और जावैं सै। 7 अर बादाम्मी घोड़यां नै लिकड़कै चाह्या के जाकै धरती पै फेरा मारै6:7 घोड़यां नै लिकड़कै चाह्या के जाकै धरती पै फेरा मारै उनकी शक्ति का उल्लेख हक अर दूतकार्य के विस्तार के अनुरूप सै जिसकै खात्तर उननै इच्छा प्रगट करी के वे अपणी इच्छा तै सारी धरती पै आवागमन करैं।।" अंत म्ह दूत नै कह्या, "जाकै पृथ्वी पै चक्कर लगाओ।" फेर वे पृथ्वी पै चक्कर मारण लाग्गे। 8 फेर उसनै मेरे ताहीं पुकारकै कह्या, "देख, वे जो उत्तर के देश की और जावैं सै, उननै ओड़ै मेरे प्राण ताहीं ठण्डा करया सै।"