12 हे उम्मीद धरे होए कैदियों! गढ़ की और मुड़ो; मै आज ए बताऊँ सूं के मै थारे ताहीं बदले म्ह दुगणा सुख देऊँगा।
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12 हे उम्मीद धरे होए कैदियों! गढ़ की और मुड़ो; मै आज ए बताऊँ सूं के मै थारे ताहीं बदले म्ह दुगणा सुख देऊँगा।
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