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प्रकाश 1

17 जब ुँिु, तब ुँिरगिु। एकथअल मनहस िु। पर अपन िाँिउपपर रकअसिकलाँ, "डर, सकिजककरइयमहिँ इतुँ। और वहइतुँ, सकिजकअनकर

18 और वहइतुँ, वन हतएकचिरहुँ। पर आब िबतुँ, और सदिनकलग िपलिरहम! और िउपपर अधिा। और िा, महिशकि हत, जहाँ अल मनबताँ। और ओइननदिकरशकि हत

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