1,2 ओकरपाछे, मै संसारके चारथो कोन्वामे चारथो स्वर्गदूतनहे ठरह्याइल देख्नु। उ स्वर्गदूतनके परमेश्वरके थेनसे संसारहे विपत्तिनके माध्यमसे नोकसान पुगैना अधिकार भेटाइल रहिँत, चाहे उ समुन्दरमे रहे या जमिनमे। ओइने हावाहे संसारके चारु कोन्वामेसे रोक्लाँ, ताकि समुन्दरमे और जमिनमे और बन्वामे बयाल ना चले सेके। मै दोसुर स्वर्गदूतहे पूरुव ओहोँरसे निक्रल देख्नु। ओकर थेन सदासर्वदा जित्ती रहुइया परमेश्वरके छाप रहिस। उ स्वर्गदूत औरे चारथो स्वर्गदूतनहे जोरसे चिल्लाके बलाइल, और कहल, 3 "हम्रे हमार परमेश्वरके सेवा करुइयनके लिल्हारीम मोहर नै लगाइतसम पृथ्वी, समुन्दर या रुख्वनहे कुछु नोकसान ना करो। ताकि ओइने उ विपतसे नाश ना हुइँत।" 4 तब स्वर्गदूतनके छाप लगाके सेक्लाँ ते केऊ महिन्हे कहल, कि जोन मनैनके लिल्हारीम स्वर्गदूतनके परमेश्वरके छाप लगैलाँ, ओइन्के संख्या एक लाख चवालीस हजार रहिन। यी मनै इजरायलके सक्कु बाह्रथो कुलमेसे आइल रहिँत।
5 यहूदक कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
रुबेनके कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
गादके कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
6 आशेरके कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
नप्तालिक कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
मनश्शेक कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
7 शिमियोनके कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
लेवीक कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
इस्साखारके कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
8 जबूलूनके कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
योसेफके कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
और बेन्यामिनके कुलमेसे बाह्र हजार जाने छाप लगागिलाँ।
9 ओकरपाछे मै वहाँ अतरा भारी मनैनके भीड़ देख्नु कि केऊ फेन ओइन्हे गिने नै सेके। ओइने संसारमे हर जाति, हर कुल, हर राष्ट्र और हर भाषामेसे आइल रहिँत। ओइने सिंहासन और पठ्वक आघे ठरह्यैलाँ। ओइने उज्जर लुग्गा घालल रहिँत। और प्रत्येक मनै अपन हाँथेम सम्मानके चिन्हक रुपमे खझ्रीक दहियाँ पकर्ले रहिँत। 10 ओइने महा जोरसे चिल्लैलाँ:
"सिंहासनमे बैठुइया हमार परमेश्वरहे धन्यवाद होए, और पठ्वाहे प्रशंसा होए! अप्नि किल बती, जे मुक्ति देहे सेकत।"
11 तब सक्कु स्वर्गदूतनके सिंहासनके आँजरपाँजर और अगुवनके आँजरपाँजर और चारथो जित्ती प्राणीनके आँजरपाँजर ठरह्याइल रहिँत। तब उ अगुवन मुन्टा लिहुरैलाँ, और परमेश्वरके आराधना करलाँ। और ओइने असिके कलाँ, 12 "आमेन! (यकर मतलब हुइत, अस्तेहेँ होए।) हम्रे घोषणा कर्थी कि हमार परमेश्वर महान, शक्तिशाली, पराक्रमी और ज्ञानी बताँ। हम्रे हुँकार आदर, महिमा और प्रशंसा करी। आमेन! (यकर मतलब हुइत, अस्तेहेँ होए।)" 13 अगुवनमेसे एक जाने महिन्हे पुँछ्लाँ, "यी उज्जर लुग्गा घलुइयन केने हुइँत, और कहाँसे अइलाँ?" 14 तब मै हुँकिन्हे कनु, "महिन्हे पता नै हो, पर अप्निहे पता बा।" ऊ महिन्हे कलाँ, "यी उज्जर लुग्गा घालल मनै डरलग्तिक दुःखके समयमे मुअल मनै हुइँत। ओइने उ मनै हुइँत, जेने पठ्वक बलिदानसे परमेश्वरके नजरमे पापसे चोखा हुइथाँ। 15 यक्रेहे कारण,
ओइने परमेश्वरके सिंहासनके आघे ठरह्यैथाँ।
ओइने दिन और रात पूरा समय परमेश्वरके मन्दिरमे हुँकार सेवा करथाँ।
और जे सिंहासनमे बैठल बताँ, ऊ ओइन्के बिच्चेम बैठिहीन, और ओइन्के सुरक्षा करहीन।
16 ओइने कबु नै भुँखैहीँ और पिअसहीँ।
ओइन्हे घाम या कौनो फेन तातुल चिजसे नै झँरस्हिन।
17 काकरेकी सिंहासनके बिच्चेम रहुइया पठ्वा
ओइन्के ओस्तेहेँके रेखदेख करहीन।
जसिके एकथो भेँरहुवा अपन भेँरीनके रेखदेख करत।
और ओइन्हे डोरयाके ऊ ओइन्हे ताजा पानी पिवाइक लग लैजिहीन।
और परमेश्वर ओइन्के आँखीमेसे सक्कु आँश पोँछदिहीन।"