समुन्दरमेसे निकरके अइलक दैँतुरवा
1 समुन्दरमेसे एकथो दैँतुरवा निकरके आइल मै देख्नु। जेकर सातथो कपार रहिस, और ओम्ने दशथो सीङ रहिस। ओकर सीङमे दशथो मुकुट रहिस। और ओकर हरेक कपारीम परमेश्वरके नाउँ लिखल रहिस, जेकर प्रयोग करना उहिहे कौनो अधिकार नै रहिस। 4 और ओइने उ दैँतुरवक पुजा करे लग्लाँ, और कहे लग्लाँ, "यी दैँतुरवक हस के बा? और उहिसे के लरे सेकी?" और मनै उ बरवार सँप्वक पुजा करना फेन सुरु करदेलाँ। काकरेकी ऊ यी दैँतुरवाहे अपन अधिकार दैदेले रहे।
16 यी दोसुर दैँतुरवा महत्त्वपूर्ण और महत्त्व नै रहल, धनी और गरिब, गुलाम रहल मनै और गुलाम नै रहल मनै रहिँत। अथवा ऊ सक्कु मनैनहे मजबुर करदेहल कि ओइने सुरुक दैँतुरवक नाउँ अपन दाहिन हाँथेम या अपन लिल्हारीम छपाइँत। 17 उ मनै किल कुछु चिज किने या बेँचे सेकिँत, जेनकेमे यी छाप लागल रहिन। उ छाप सुरुक दैँतुरवक नाउँ या ओकर नाउँहे जनैना एकथो संख्या रहे। 18 यी चिन्हक व्याख्या करक लग तुहुरिन्हे बुद्धिमानीसे सोँचे परी। पर जेकर थेन ज्ञान बा, ऊ यिहिहे पता लगाई सेकदारी कि यी दैँतुरवक संख्यक मतलब का हो। काकरेकी यी संख्या एकथो मनैयक नाउँ हो। यी संख्या छे सौ छ्यासट्ठी (६६६) हो।