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Apocalipse 15

तथवरगदतनकऔर तथिपत

1 यकर े, आकशमएकथआकिु, बहअचमलगिऔर डरलगिरहे। वहाँ तथवरगदरहिँ, तथअलग-अलग ििपतरहिँअनििपतकरजब ओइनओरिीँ, तब परमवरकिओरि2 तब िु, समदर हस इते। ििहस चमकते, और ओमआगिलल रहे। मननहु, ैँरवरल रहिँओइनैँरवक और ओकर िआरधनकरल रहिँऔर ओइनैँरवक सङयक लगइल रहिवहाँ ओइनसमदरकििठरहइल रहिँऔर ओइनसकिपकरल रहिँ, िओइनपरमवर रहि3 ओइनपरमवरकशक इतििँ, पठवक ा। ओइनइतििँ: "सरवशकिरभपरमवर, अपिकरलक अचममक और महा। अपि सकशकरजइती। अपि करी, सहि और धरा। 4 रभु, सकमनअपिडर मनाँ, और ओइनसकअपिसमकरथाँ। करअपि िपविपरमवर इती। हरिमनअपिअइथाँ। और ओइनअपिआरधनकरथाँ। करअपिधरसकनहमजपतबति" 5 जब मनबनकरदाँ, तब ि वरगममनिलल रहे। गवतमहस ो। िििमनअपन लसम रहिँ, जब ओइनउज़-करतििँ6,7 तब तथवरगदनहसकनसतथिपतपरनरहि, ओइनमनिरमिकरलाँ। ओइनचहकउजजर घलरहिँऔर ओइनओहोँनक पटरहितब रथिि नमएकथहरवरगदतनहसदििरहइयपरमवरकओहोँरसे, डरलगिदणडसभरल एकथनक िहल8 मनिपरमवरकमहिऔर शकिअइनाँभरगितबमनिरमकल, जबसम तथिपतओरि, नहतथवरगदतनकनल रहिँ

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