जन्नी मनैया और दैँतुरवा
1 उ सातथो खोरिया बोकल सातथो स्वर्गदूतनमेसे एकथो स्वर्गदूत मोरिक थेन आके कहल, "यहोँर आऊ, मै तुहिन्हे देखैम कि कसिके परमेश्वर उ महावेश्याहे दण्ड दिहीँ। जे एकथो असिन ठाउँमे बैठल रहत, जेकर तरे बहुत्ते लदिया बा। 2 जेकर संग पृथ्वीक रज्वन व्यभिचार करलाँ। और उ सारा मानव जातिनहे अपन जाँर-दारुसे मत्वार करादेहल। जेकर मतलब यी हो कि ओकर व्यवहार गजब खराब बतिस, जोन व्यवहार उ सारा मानव जातिनहे सिखैले बा। काकरेकी ऊ ओइन्हे मूर्तिक पुजा करे सिखैले बा।" 3 तब् पवित्र आत्मक सहायतासे स्वर्गदूत महिन्हे उजाड़-ठाउँमे लैगिल। तब मै वहाँ एकथो जन्नी मनैयाहे देख्नु, जे एकथो लाल रङ्गके दैँतुरवक उप्पर बैठल रहे। उ दैँतुरवक सातथो कपार और दशथो सीङ रहिस। ओकर शरीर उ नाउँसे छोपल रहिस, जोन नाउँ परमेश्वरके अपमान करतेहे। 4 उ जन्नी मनैया भाँटा रङ्गके और लाल रङ्गके लुग्गा घालल रहे। उ अपन शरीरहे सोनक गहनासे, बहुमूल्य पत्थर और महिँगा मोतीनसे सजाइल रहे। ऊ अपन दाहिन हाँथेम दारुसे भरल एकथो सोनक खोरिया पक्रल रहे, जोन ओकर घृणित काम और खराब यौन अभ्यासहे जनैथिस।